बारिश का एहसास💕🌧️⛈️

#goldenmoons poetry

मैं भीगना चाहती हूं,
बारिश में..
बारिश के उस हर एहसास में,
जो मेरे मन को छू जाते हैं,
मैं भर जाना चाहती हूं,
उन तुम्हारी तीखी बूंदों से,
जो सूखी जमीन को भीगा देती हैं,
मैं भीगना चाहती हूं,
बारिश में…
उस हर मनमोहक मुस्कान से,
मैं फिर रूबरू होना चाहती हूं,
जो सिर्फ तुम दे जाती हो,
मैं देखना चाहती हूं,
तुम्हारे और बदल की गरज की,
वो बेधड़क सी ताल से,
प्रेम के जलपात में,
हां यही प्रेम,
मैं भीगना चाहती हूं,
बारिश में।

Originally written By ©Dr. Sakshi Pal

Author:

be the part of the present

15 thoughts on “बारिश का एहसास💕🌧️⛈️

    1. So true ❤😊🌼

      चाहता था पकडूँ उड़ती तितलियों को

      किसी ने कहा,

      क्या बचकाना हरकत है ??

      उन्हे कहाँ पता,

      बेशक तितली नहीं आयी पकड़ में

      हाँ, मैंने सहेज ली..

      एक मुट्ठी निश्छल खुशियाँ।

      Well written

      Liked by 1 person

  1. क्या बात। लाजवाब प्रस्तुति। खूबसूरत रसहना।
    चाहते अनंत,
    मेरी चाहत सिर्फ भींग जाने की,
    कुछ भी ना हो शेष
    कहने को सूखा,
    तपती रेत सी जिंदगी,
    क्या उसे बदल पाओगे,
    बन जाऊँ महि मैं
    क्या बादल बन जाओगे,
    बन जाऊँ महि मैं,क्या बादल बन जाओगे।

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s