जरा देखो तो…..!!!!

अरे जरा देखो तो कोई भूंखा तो नहीं है
दो रोटी हम सुख से खाए
उन दो रोटी से कोई वांछित तो नहीं है
यूं कोई बनाए पकवान कोई खाए खीर
कोई बहाए पसीना धूप में पी भी ना पाए नीर
अरे जरा देखो तो कोई प्यासा तो नहीं है
तन पर लिपटे पोशाकें रंग बिरंगे फैशन में
कोई पहने फटे वस्त्र रंगे जो मिट्टी रंग में
अरे जरा देखो तो कोई नग्न तो नहीं है
यूं तो बोरिंग लॉकडाउन पिकनिक को मन तरसे
कोई चले नंगे पांव तड़पे छालों की जलन से
अरे जरा देखो तो कोई धूप में तड़प रहा तो नहीं है
हम करें ठिठोली हंसे घर में अपनों के बीच
कोई तड़पे दूर देश लिए आंसू हम सब के बीच
अरे जरा देखो तो कोई अकेला तो नहीं है
मैं भाव से भर आती हूं जब रोज देखती हूं
लोगो की तड़प को जो हर रोज खोते हैं अपनों को
ना जाने कितनो के घर चूल्हे भी नहीं जलते
कि कोई मर जाए तो उसे छू भी नहीं सकते हैं
कैसे प्रकृति रूठी है हमसे मानवता जो मारी है हमने
हूं निशब्द मैं उदास सी मन ही मन में
झुका कर सर नतमस्तक हो आगे उस शक्ति के
है विनती यही सभी रहे सुखी अपने घर में
हो अमन जहां में फिर वही और सीखे हम फिर से
जीवन के इस अमूल्य अनुभव को
बस जरा देखो इतना कहीं मानवता मरी तो नहीं है।

Published by “Anonymous” on behalf of ©Dr. Sakshi Pal

 

Author:

be the part of the present

58 thoughts on “जरा देखो तो…..!!!!

  1. सच मे रोज 5000 लोग मर रहे😑कोरोना से गरीबी आएगी उससे कितने बिचारे …और अभी कोरोना का Worst आना भी शेष है😔

    अच्छी कविता आज की परिस्थितियों को बतलाती हुई😊 दोस्त 🌼

    Liked by 3 people

    1. सही कहा दोस्त बस उस ईश्वर से विनती करो कि हम सभी को इस स्थिति से उबरने की हिम्मत दें। सभी लोग आपस में एक दूसरे कि मदद करें।
      Thank you dost समय निकाल पढ़ने के लिए🙏😊🌺

      Liked by 1 person

      1. 3-4 आप जैसे मित्रों का ही पढ़ पाते समय न मिलता 😇
        आज पिताजी की dialysis कराने गए थे , हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे कोरोना से…अब up में भी मामले ज्यादा आने लगे है कोरोना के…

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  2. सुंदर भावाभिव्यक्ति👏 बस कहीं कहीं मात्रिक त्रुटियाँ हैं। 🙏

    Liked by 3 people

      1. मात्रा जानने हेतु कभी कभार मेरी पोस्ट पर घूम आया करिये।

        Liked by 2 people

    1. अगर कविता पाठकों के दिल को छुए और कुछ बदलाव लाए तो लिखना सफल है। बहुत आभार दोस्त।😊🤝🌺🍬🍬

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  3. बहुत खूबसूरत कविता लिखी हैं,सच में दिल को छू गए , प्रिय मित्र साक्षी 😄🤝💖💖💖💖💖👌 best’word

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  4. आज कोई और तड़प रहा
    कल कोई और तड़पेगा,
    आज कोई और नँगा,
    कल कोई और होगा,
    कहीं हंसी ,कहीं मातम,
    कहीं भीड़ कहीं सूनापन,
    ईश्वर के हाथों में मुरली नही,
    अब चक्र सुदर्शन ही सजेगा,
    रावण ,कंस से ज्यादा अहंकारी हो गए हम
    और पूछते
    ये कहर कबतक बरसेगा।

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