मेरे अश्कों से…..!!!!!

मेरे अश्कों से बेखबर है वो
दिल की तड़प से बेखबर है वो
मैं टूटी हूं इस कदर अब
कि उसकी खनक से बेखबर है वो
रंग के मेरे हाथो को अपने वादों से
उसी को भूल बैठा है वो
हां स्त्री हूं समर्पण के साथ प्रेम निभाया है जो
तो क्यों हर बार स्वार्थी का लांछन दे देता है वो
कहते हैं इश्क करना आसान नहीं
पर ना जाने कितनो से इश्क फरमाते हैं वो
मैं बेखबर उसकी बेवफाई से
लिए अश्रु नयन निहारे उसके रास्ते को
वो हर बार उलझा के झूंठ से लबालब जाल में
हर बार और बार बार खंजर भोंक जाते है वो
कभी सोचूं मैं वो गलत नहीं
छले तो हम खुद हैं जानते हुए भी बेवफा हैं वो
बेवफा है वो।
©Dr. Sakshi Pal

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be the part of the present

34 thoughts on “मेरे अश्कों से…..!!!!!

  1. वाह बढ़िया लेखन
    भई ऐसा सच मे है तो दे मारिये लात ऐसे कारोबारी प्रेमी और ऐसे प्रेम को🌸❤😃
    प्रेम
    बहोत विचित्रता है इसमे
    पुरुष जिस स्त्री से प्रेम करता है
    वह स्त्री उस पुरुष के लिए
    विलक्षण हो जाती है
    वह दे सकती हैं उसको मुक्ति
    उसे स्वीकार या अस्वीकार करके
    पुरुष जब प्रेम में होता है
    तब वह एक ऐसे क्षितिज पर होता है
    जिसके दोनों तरफ़ का मार्ग
    उसकी मुक्ति का ही मार्ग होता है
    🌸❤😃

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    1. वाह। बहुत ही बेहतरीन रचना और आपका भी । दोनों डॉक्टर का जवाब नही।
      कभी कहते जिसे शरबती आँखें,
      अब नीर भरा समंदर खारा है,
      जिससे रिसते नीर,
      हरपल,
      दोष किसका,
      उनका तो नही,
      सब कुसूर हमारा है।
      हर मौसम ऋतुराज कलतक,
      मैं भी मधुमास से कम नही,
      पवित्र ऐसे जैसे कोई तीर्थ,
      मेरे समान निर्मल गंगा,जमजम नही,
      दौड़े चले आते ऐसे जैसे वर्षों का कोई प्यासा,
      मैं ही थी मीरा उनकी मैं ही थी राधा,
      खिली पंखुड़ियों सी अधरें
      टपकते मकरन्द,
      कोयल सी बोली
      बदन बिखेरती सुगन्ध,
      न जाने वे क्या क्या बखान करते,
      और हम उनके शब्दों में खोए मन्द मन्द मुस्कान भरते,
      निरन्तर उनकी कल्पनाओं को साकार करते रहे,
      वे करते रहे फरेब और हम उसे
      प्यार समझते रहे,
      वे करते रहे फरेब और हम उसे प्यार समझते रहे।

      Liked by 4 people

      1. आपकी किताब amazon पर आ गई …जल्द हमारे पास भी होगी🌸❤

        Liked by 1 person

  2. ‌‌‍‍‌‌‌लगता है कि प्रेम के सागर में डूब कर लिख है आपने इसे 😜👌
    बेहद खूबसूरत रचना😊

    Liked by 4 people

  3. Bahoot khoob Likha Apne .
    Kuch to kasis h uski aadao me
    Ki payar ham khule aam krte hai
    Ye jankar BHI, ki wo bewafa hai
    Phir BHI ye zuram bar bar krte hai.

    Liked by 2 people

  4. दुख खोने या पाने की नही। तड़प तो अब भी कुछ देने की है।
    शायद लेते लेते उसकी झोली भर गई और देते देते भी झोली वैसी की वैसी।
    अब तो गमों सैलाब उमड़ रही है
    उस वीराने में,
    कभी खुशियों की महफ़िल सजती थी
    जिस तहखाने में।

    Liked by 2 people

  5. सही कहा कि आपने….अब प्रेम में डूबने को कुछ बचा ही नहीं है। कृष्ण से प्रेम का मार्ग तो अथाह है, ना तो उसका कोई आरंभ है और ना ही अंत।😇😊

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  6. नमस्कार! दुख की बात है, कठिन और अनुचित महिलाओं के जीवन में सामांय रूप से, और उन “बेवफा
    शाश्वत स्वर्गीय और सांसारिक आशीर्वाद, प्रिय सुंदर आत्मा

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