हे री सखी……!!!!

हे री सखी
कौन है ये श्याम रंग
जिसकी आभा नीराली
पटपीत पीताम्बर सोहे
चमक रही समुचित आली
को है ये ऐसो
जिसकी छवि निराली
नयन हिरण से
अधर सुमन से
बजाए बंसी निराली
हे री सखी
कौन है ये श्याम रंग
जिसकी आभा निराली
©Dr. Sakshi Pal

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be the part of the present

23 thoughts on “हे री सखी……!!!!

  1. 😍😍😍❤🌸 too good….सूरदास जी को पढ़ रही क्या दोस्त ….कृष्ण के लिए ऐसे शब्द उनसे ही पढ़े थे अबतक 👌👌

    Stellar 💫

    Liked by 2 people

      1. अच्छी अभिव्यक्ति को ही सच्ची अनुभूति होती 🌸❤ keep going frnd…Few talents are rare 🌸

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  2. Nicely written… हिंदी के साथ थोड़ी सी ब्रज भाषा जोड़कर आपने दिल खुश कर दिया। दोनों भाषाओं में बेहद खूबसूरत तालमेल बिठाया है आपने।
    मैं ब्रज क्षेत्र से हूँ और एक ब्रजवाशी को अपनी क्षेत्रीय भाषा कहीं पढ़ने-सुनने को मिल जाए, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है जी??

    Liked by 3 people

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