कुछ तो रिश्ता है…..!!!!

कुछ तो रिश्ता है,
तेरा मेरा ओ री वर्षा
बेवजह तू भी नहीं
बेवजह मैं भी नहीं
भीगी तो तू भी है
भीगी तो मैं भी हूं
गरज के, कड़क के
बादल तेरे साथ हैं
जितना गरजता है
तू उतनी बरसती है
अपने ही उन्माद में
घनघोर संवाद से कर
प्रेम का शंखनाद
तू करती प्रेम का आह्वान
मैं भीगती हूं
तेरे प्रेम के जलपात में
अश्रु लिए मूंदे अपने
लिए भीगे से नयन
कि करती हूं मैं भी
जतन, के लगे अबके
यूंही मुझे भी तो
तुझ सी ही कोई अगन
तेरे और बादल के प्रेम सी
कि बरस जाऊं तुझ सी
तभी तो सार्थक होगा
तेरा मेरा रिश्ता
कुछ तो रिश्ता है
तेरा मेरा
सुन ना ! ओ री वर्षा।
©Dr. Sakshi Pal

Author:

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25 thoughts on “कुछ तो रिश्ता है…..!!!!

  1. बेहद खूबसूरत रिश्ता हैं ना
    तेरे और मेरे दरमियान …
    ना तुमने कभी बाँधा और
    ना मैंने कभी छोड़ा…
    💕💕💕💕💕
    मैं और वो
    चल रहे थे साथ साथ
    एक ही रास्ते पर
    बिना शर्तो समझौतों के
    खुश थे शायद….💕

    आबाद मुझ में.. तेरे सिवा और कौन हैं..??
    तुझ से “खफ़ा” हूँ मगर तुझे “खो” नहीं सकती…..
    💕💕💕
    उसकी हर ख़ामोशी देती है मुहब्बत की गवाही,
    वर्ना कौन अजनबी से हर बात पर तकरार करता..!!

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  2. बोहोत सुन्दर कविता …..ब्यूटीफुल फ्लो ऑफ़ इमोशन्स …बहुत बढ़िया प्यारे दोस्त 😃💫✨❤

    Liked by 2 people

  3. वाह। बहुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति।👌👌

    तुम भी गरजते हो,हम भी गरजते हैं,
    तुम भी बरसते हो,हम भी बरसते हैं,
    कोई सुन ना ले मेरी चीखें,
    कोई देख ना ले मेरी आँसूं,
    अतः,तेरे आने का इंतजार किया करते हैं,
    तेरा मेरा दर्द एक जैसा,
    कैसे कहें कितना प्यार किया करते हैं।

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