तन्हाई अच्छी लगती है…..!!!!

तन्हाई अच्छी लगती है
खुद से मिलने की वजह बनती है
तेरे सींचे हुए पौधों को
चुप रह कर मौन होकर
सब कुछ समझने की अदा बनती है
तब!
तन्हाई अच्छी लगती है
दुनिया की इस भीड़ में
रीति रिवाजों के इस भंभर में
इस जाल में जिंदगी जब
उलझी हुई सी लगती है
तब!
खुद से खुद तक चलने की
वजह बनती है तो सच कहूं तो
तन्हाई अच्छी लगती है
©Dr. Sakshi Pal

Author:

be the part of the present

54 thoughts on “तन्हाई अच्छी लगती है…..!!!!

  1. बहुत बढ़िया।👌👌
    भीड़ बहुत पर तुम ना आए,
    आए जब तन्हाई थी,
    आँखें तरस रही थी यादें
    तेरी धूम मचाई थी।

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    1. Thank uh so much for your kind words and yes its absolutely right that when you are alone you are not alone you are with yourself….me time 🙏👍that is a best time to observe yourself, your surroundings 👍

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  2. Alone is what I have …alone protects me .
    — Sherlock Holmes ❤

    कभी निकलो
    कविताओं की पंक्तियों से बाहर
    उस छ्द्म भेष से बाहर
    जो बतौर प्रेमी तुम्हे
    तुम्हारी मूर्खताओं और
    विफलताओं से बचाता है
    बिछड़ चुके साथी से मिलो
    किसी व्यापारी की तरह
    बताओ अपने नुकसान के बारे में
    और बताओ
    तुम हार नही मान रहे
    नए व्यापार की योजना बना रहे
    घृणा से बचना हो तो !!
    -unknown

    Well written

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    1. भीड़ बहुत पर तुम ना आए,
      आए जब तन्हाई थी,
      आँखें तरस रही थी यादें,
      तेरी धूम मचाई थी।

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    2. क्या बात।👌👌
      भीड़ बहुत पर तुम ना आए,
      आए जब तन्हाई थी,
      आँखें तरस रही थी यादें,
      तेरी धूम मचाई थी।

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      1. यादों की श्रृंखला तो देखो
        धरती पर गगन की बरसात तो देखो
        कोई ना आए कभी मिलन को
        पर मेघ ही धरा की प्यास बुझाए
        प्यास प्रेम की ।

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  3. बहुत खूबसूरत।👌👌
    भीड़ बहुत पर तुम ना आए,
    आए जब तन्हाई थी,
    आँखें तरस रही थी यादें,
    तेरी धूम मचाई थी।

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  4. तेरे सितम की दास्तां किसको सुनाऊं मैं
    तूने दिए जो ज़ख्म वो किसको दिखाऊँ मैं
    अब ऐसे मोड़ पर है मेरी ज़िन्दगी जहाँ

    बस इसी वजह से “तनहाई अच्छी लगती है”

    बहुत कुछ कहती है आपकी पंक्तियाँ।

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    1. वो सन्नाटे में लिखती हैं बैठ के
      तन्हाई उसकी यार है
      क्या करना है जख्मों का यारो
      वो दर्द भरी किताब है
      खामोशी को चीरती हुई बोली है उसकी
      कोहराम तो मचेगा ही

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      1. बेवजह सन्नाटों में बैठे हो तुम
        तन्हाई के चादर ओढ़
        न पढ़ उस किताब को
        जिसमें जख्म के यादें हो और दर्द की बातें हो
        बस इतना बता दे मुझको
        शूकुन मिला या नहीं

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      2. सन्नाटे में दर्द की चादर हैं तो खुशी की कालीन भी है
        क्यों तू अक्सर दर्द से ही मुखबिर है तन्हाई में
        क्या पता ये तन्हाई तुझे तुझ से मिला दे

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      3. दबी रहेगी खुशी की कालीन पैरों के नीचे हर दम
        गर तुम ओढ़ें रहोगे चादर दर्द के हर दम
        छोड़ों भी ये तन्हाई के गुफ्तगू
        बस एक बार मुस्कुरा के देखो
        सच कहता हूँ
        कभी इन पंक्तियों में छलकते जज्बात को तो देखो

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      4. जज्बातों की दुनिया अब और है
        यहां अपने कोई पर गैर कोई और है
        खुशी भी तब होगी जब दर्द का एहसास होगा
        अपना कौन है ये तभी तो फैसला होगा
        मुस्कुराने की वजह क्यों ढूंढू
        ढूंढो उसे जो मिले ना
        यहां तो हर दम खुशी का गुलिस्तां होगा
        पैरों तले कालीन खुशी की
        खड़ी हूं जिसपे में सर उठा के
        चादर है गमो की संग
        पर हैरान!
        तुम इन बाजुओं को तो देखो जो
        फैली है लिए मुट्ठी में आसमान

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      5. लगता है बड़े काम कि है ये तन्हाईयां
        तो चलो अब करना कुछ नहीं है
        बस आओ न, बैठो न
        और मुकर जाओ न
        उन वादों से
        और कर दो मुक्त हमें ज़िंदगी से
        हाँ-हाँ हम भी बाँहें फैलाए है
        पर मुट्ठी खोलने को

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      6. पास बिठा ,और पास बुला के
        कुछ बड़े करते हैं वो इस कदर
        उन्हीं वादो को वो जार जार तोड़ते है
        रेत के जैसे है ये वादे भी तो
        जो खोलो तुम तो स्वत: ही मुक्त हो जाओगे।

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      7. सच कहा है
        जितना संभालता हूँ
        उतना हि फिसलता हूँ
        युं कहूं तो
        जितना खोता हूँ
        उतना हि टूट कर रोता हूँ

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      8. अश्रु मोती क्यों व्यर्थ है ये
        तू संभाले जो मुझको
        तो संग है ये
        खोते हो तुम
        संभलते हैं हम
        टूटे जो तुम
        तो!
        क्या खाक जुड़ेगे हम

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      9. ज़िंदगी के कुछ मोड़ में
        कुछ पल एैसे आते है
        कि आँखों में आँसू आ तो जाते है
        पर वो न आ पाते है

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      10. जाया न कर ये अलफाज हर किसी के लिए
        बस खामोश हो जा खुद के लिए
        माना की वो अनुभव का ही हिस्सा है
        पर हकीकत यह है की अब वो कहानियों का किस्सा है

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      11. ख़ामोश ही तो हूं खुद के लिए
        खो गए थे जो कहीं राहों में
        चलो मिलते हैं खुद से आज
        जरा बैठते है अपने पास
        ये तन्हाई खूबसूरत लगती है
        तभी तो बोला जा अरसे बाद खुद से मिले
        तब
        तन्हाई अच्छी लगती है।

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      12. जो चले गए
        उनके आने का इंतजार कैसा,
        वे कहते हैं,
        छलकते आँसुओं का अब धार कैसा,
        अरे वे भूल गए,
        ये फितरत थी उनकी,
        हम भूल जाएँ, फिर वो प्यार कैसा?
        मुद्दतों का सफर था,
        न जाने कितने पल
        संग बिताए थे,
        आसान नही था,
        दिल की बात जुबां पर आना
        बहुत शिद्दत से दिल लगाये थे,
        अरे बहुत प्यारी हैं वो यादें,
        तन्हाई में भी गुदगुदाती है,
        इन अश्कों पर मत जाओ
        देख ये होठ,अब भी मुस्कुराती है,
        तुम कहते हो सब भूल जाऊँ,
        अरे,जो याद ही नही किया
        उसे भुलाऊँ कैसे,
        ये प्रेम है कोई सौदा नही,
        इसे किसी और पर लुटाऊँ कैसे,
        वो खत,वो शब्द,वो बातें वो साँसें,
        वो खुशबू,वो महक,
        अब भी उसके होने का एहसास दिलाते हैं,
        बिन इसके ये संसार कैसा?
        वे भूल गए,
        ये फितरत थी उनकी,
        हम भूल जाएँ, फिर वो प्यार कैसा?
        हम भूल जाएँ, फिर वो प्यार कैसा?

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      13. आपकी कविता और सबकी प्रतिक्रियाओं ने कुछ शब्द दिए और एक रचना बन गई। धन्यवाद आपका।

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  5. Omg..very lovely expression dear!

    “तेरे सींचे हुए पौधों को
    चुप रह कर मौन होकर
    सब कुछ समझने की अदा बनती है
    तब!
    तन्हाई अच्छी लगती है”

    These lines touched my heart 👌👌

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    1. It’s my luck that you read my poems dear 🙏😊 thanks for your efforts. It’s really very fantastic feeling.my gratitude to God, my fellow bloggers and readers who always motivates me by their comments , likes. A big thanks to you 🌺😊.

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    2. My silence , my presence , flow of my breath , no one , just me in mine world , tik tok of watch , and feeling of relaxation in every beat , my heart beat ,with the sound of lubb dubb ……

      # metime#💕

      #Loveyourself #✨🌺💫

      ————— when you alone remember you are not alone you are with yourself ,,,, how amazing is that no?😁 to meet yourself ….just try it ….. observe yourself , your thoughts , your vibrations , your energy , it’s come under the meditation😁💞🌺✨💫

      ——-with lots of love

      Dr. Sakshi pal

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