कान्हा की प्रीत रंग…..!!!!

रंग दो कान्हा मोहे प्रीत रंग,
जो उतरे ना ये सारी उमर,
जीवन के इस कोरे पन्ने को,
रंग दो अपने प्रीत के रंग,
रंग वही जो कृष्ण का हो,
तुम्हारे मेरे प्रेम का हो,
जग अनभिज्ञ जिससे रहा,
मुझे तो वहीं प्रेम का मोती मिला,
ये प्रेम रंग ना इस जन्म का,
ये तो रहे अब जन्मों जनम,
मेरे प्रियतम तो तुम,
हर सांस की सरगम तुम,
जग पागल मोहे बोले है,
पर मैं तो रंगी अपने,
प्री(कान्हा) के रंग,
होली के रंग में कान्हा का रंग,
मेरे ह्रदय में प्रेम रंग,
पुलकित कर दे जो अंग अंग,
रंग दो कान्हा मोहे प्रीत रंग,
अब ना चढ़े कोई और रंग।
©Dr. Sakshi Pal

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23 thoughts on “कान्हा की प्रीत रंग…..!!!!

  1. खूबसूरत रचना।

    आपको और आपके परिवार को होली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. इतनी खूबसूरती से लिखा है कि आँखें भर आईं🙏🙏🙏
    वो कहते है न
    श्याम पीया
    मोरी रंग दे चुनरीया
    लाल न रंगों
    पीली न रंगों
    मोहे तो अपने ही रंग में रंग दो
    😊😊😊😊😊😊😊

    Liked by 2 people

      1. वैसे आज ही वह पूर्णिमा है…जब कृष्ण ने संंभवत अंतिम बार, राधा संग रास या महारास किया था..आप हो सके तो इसका आनंद लीजियेगा।😃😃😃

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