कुछ और है…..!!!!

हर जख्म नासूर है,
हर किसी के हाथ में नून है,
किसे सुनाएं दर्द ए दिल की दास्तां,
यहां हर किसी के दिल में कुछ और है,
कोई राज ना कहना जमाने से,
ए दोस्त,
ये जमाना बड़ा खराब है,
यहां हर चेहरे के पीछे कोई और है।
©Dr. Sakshi Pal

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be the part of the present

17 thoughts on “कुछ और है…..!!!!

  1. जल्दीबाज़ी में लिखा है क्या ?😄 परीक्षा है न 😂 ❤✨
    भाव अच्छे है …पंक्तिया थोड़ी और स्पष्ट हो सकती
    बढ़िया लेखन

    अटल जी की याद आ गई

    टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर ,
    पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर,
    झरे सब पीले पात,
    कोयल की कूक रात,
    प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं।
    गीत नया गाता हूँ।

    टूटे हुए सपनों की सुने कौन सिसकी?
    अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी।
    हार नहीं मानूँगा,
    रार नहीं ठानूँगा,
    काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ।
    गीत नया गाता हूँ।

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  2. Hi Sister! y b so negative abt life and others? There are many good people as well to share
    everything with them. It all depends on us.If we are negative,we will attract negativity only.So we shud first look within and change our thoughts-life will be wonderful with others.

    Liked by 1 person

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