इश्क था आखिर….!!!!

झुकी आंखो से कैसे कहते हम,
ख़ामोश रात और तुम्हारा साथ,
उस घोर अंधेरे में,
और उस चांदनी रात का श्रृंगार,
अनकहे से तेरे मेरे जज़्बात,
लबों पर आते भी तो कैसे आते,
पर इश्क छिपा कहां है जी?
झलक ही आया आंखो में,
झुकी आंखो से कुबूल ही लिया,
जो लबों से कह ना सके हम।
कितना कुरेदोगे इस दिल को तुम,
जब जान ही लिया है,
इसमें सिर्फ तुम हो।
लब उसके ख़ामोश थे,
निगाहों में एक अफसाना था,
कहा रुकते अब ये जज्बात,
इन्हें तो अब शोर मचाना था,
हाँ जी,
इश्क का शोर मचाना था।
©Dr. Sakshi Pal

Author:

be the part of the present

34 thoughts on “इश्क था आखिर….!!!!

  1. कितना कुरेदोगे इस दिल को तुम,
    जब जान ही लिया है,
    इसमें सिर्फ तुम हो।😊🙏🙏

    Mujhe lagta वो सही समय के intezar me hai 😂

    वैसे किसी को दुखी कर के वह खुद भी खुश नहीं रह पाएगा कभी 🙂
    बढ़िया लेखन ..❤

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      1. चलिये आपको जो बेहतर लगे मैं तो आपकी बातों से सहमत ही हो जाता हूँ 🙏 लिखते रहा करिए, आपकी पंक्तियों की प्रतीक्षा में रहता हूँ मैं🙏

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  2. कितना कुरेदोगे इस दिल को तुम,
    जब जान ही लिया है,
    इसमें सिर्फ तुम हो।
    कितनी खूबसूरत प्रेम भरी पँक्तियाँ।👌👌

    प्रेममय दिल था होठों से कुछ ना कहा,
    नैन शर्मीली पलको का पहरा रहा,
    साँस चलती रही,दिल धड़कता रहा,
    चीरकर प्रेम तम शोर करता रहा,
    पत्ते-पत्ते को थी क्या हवा चल रही,
    बाग कैसे वहाँ बेखबर बेखबर थी,
    दिल हमारा था उनका ठिकाना मगर,
    फिर भी उनको नही कुछ खबर थी,
    दिल हमारा था उनका ठिकाना मगर,
    फिर भी उनको नही कुछ खबर थी।

    Liked by 2 people

      1. दिल को छूती पंक्तियों ने कुछ लिखने को मजबूर किया। स्वागत आपका। लिखते रहिये।

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