घरौंदे उनके कोई तो संभालेगा

वो खड़ा है अकेला धरा पर,
समेटे खुद में नन्ही सी जान,
सूखा खुद जीवन के पतझड़ में,
देता सहारा यूं ही बेवजह,
घरौंदे उनके भी कौन संभालेगा,
हवाओं में रह के रुख कौन बदलेगा,
वो परवरधिकार बैठा है वहां,
उसी ने भेजा, वो ही संभालेगा।
यूं हौसले कमजोर ना कर तू
तू उड़ान भर, हवा का रुख भी बदलेगा,
वो निकला है घर से आज फिर,
छोड़ मुकद्दर खुदा पे,
उसके घरोंदे अब खुदा संभालेगा।
वो सूखा खड़ा है ओंट में लिए घोंसले को,
सनसनाती हवा और जाड़े के कहर को सहे,
लिए संभाले, समेटे खुद में नन्ही सी जान को,
रख हौसला बुलंद अपना ए बंदे,
बसंत फिर हरियाली लाएगा,
वो जो करे इंसानियत,
वो जो करे निस्वार्थ प्रेम,
खुदा का एक पैगाम,
तू करता चला चल करम अपने,
रास्ते वही दिखाएगा,
वो खड़ा है अकेला धरा पर,
समेटे खुद में नन्ही सी जान,
सूखा खुद जीवन के पतझड़ में,
देता सहारा यूं ही बेवजह,
घरौंदे उनके कोई तो संभालेगा।
©Dr. Sakshi Pal

Author:

be the part of the present

62 thoughts on “घरौंदे उनके कोई तो संभालेगा

  1. बहोत उम्दा लेखनी सर 👌

    असर होगा दुआओं का फिर से, ऐ रफीक़ तू फिक्र न कर,
    तेरी मुसीबतों का निज़ात ख़ुदा करेगा, गैरों से कभी जिक्र न कर

    Liked by 3 people

  2. बहुत शानदार
    घरौंदा मतलब ?? खेलने के लिए बच्चों द्वारा बनाया हुआ कागज़,मिट्टी आदि का छोटा घर

    यही होता क्या

    उर्दू शब्द है शायद

    शानदार लेखन
    सीखने की चाह हो तो क्या मुमकिन नहीं😊

    Liked by 3 people

    1. मिलती किसी को सुकून महलों में,
      किसी के लिए जान है घरौंदा,
      मिट्टी की दीवालें,
      तृणों का अंबार,
      देखने में तुक्ष मगर
      यहाँ भी लाखों के पलते हैं
      सपना सलोना।

      Liked by 4 people

    2. बिल्कुल सही बात सीखने की चाह हो तो क्या मुमकिन नहीं ।
      घरौंदा मतलब छोटा सा घर जो घास फूस का बना हो । यहां मैने घोसले को चिडियों का घरौंदा कह कर संबोधित किया है। 😊🌺

      Liked by 1 person

      1. हमने तय किया अब हम अंडरग्राउंड रहेंगे …corona virus का प्रकोप जो है , पर असल कारन CAA और NRC से सम्बंधित है … 😭😭😭😭😍✨

        Liked by 1 person

  3. बहुत अच्छा किया सारिका ने! मैं विशेष रूप से इस मार्ग के बारे में उसी तरह महसूस करता हूं; “वसंत फिर से हरियाली लाएगा,
    जो इंसानियत करता है,
    वह जो निस्वार्थ प्रेम करता है,
    भगवान का एक संदेश, “हाँ वास्तव में निराशा या निराशा न होने देने के लिए यहाँ आशा का संदेश है। किसी भी तूफान या मौसम को शांत करने के लिए धैर्य रखना एक महान गुण है; अंततः जैसा कि हमेशा वसंत की धूप के साथ होगा। ताजगी और सब कुछ नए सिरे से, सुंदरता और खुशी के एक बार फिर से दिनों की पकड़ लेने की अनुमति देने के लिए आगे बढ़ रहा है! यहाँ बहुत उत्साहजनक और प्यारा हार्दिक अभिव्यक्ति मित्र।
    भगवान तुम्हें आशीर्वाद दे और आपको बनाए रखे!
    तथास्तु।
    लॉरेंस

    Very well done Sarika! I feel the same way about this passage in particular;
    “Spring will bring greenery again,
    The person who does humanity,
    He who does selfless love,
    A message of God,”
    yes indeed a message of hope here to not regret or let despair come in, to be calm and patient is a great virtue to weather any storm or season; ultimately as it always will to the sunlight of Spring with all the freshness and everything anew, blooming forth to allow the bounty of beauty and joy to once again take hold of the days! Very encouraging and lovely heartfelt expression here friend.
    God Bless You and Keep You!
    Amen.
    Lawrence

    Liked by 3 people

      1. Oh yes sorry deal lady, ✨😊 I know that for sure but have been dealing with a head cold and now and then some thought glitch occurs, too tired lately! I know a Sarika but you are most definitely Sakshi with Golden Moon Poetry. My apology for mixing up your name with that other very nice lady poet!
        Both very lovely names by the way in my humble opinion. 😊
        Thanks for the heads up, I’ve been making so many typo errors in all of my writing lately and try to go over them with a fine tooth comb to correct the errors but will up my game here! Lack of sleep lately too puts a dent in my head! 🤣 😉

        Liked by 1 person

  4. सबसे पहले तो माफी चाहता हूँ इतना लेट पढ़ने के लिए……आपकी पंक्तियाँ बेहद खूबसूरत और उम्दा है……सोच तो काफी अच्छी है….बस कुछ कर गुजरने कि हिम्मत भी रख लो🍭🍬😊

    Liked by 3 people

  5. बहुत सुन्दर लेखन, उत्साहवर्धक और विश्वास वर्धक भी | साधुवाद  आपको |

    सोचता हूँ अगर घरौंदा बनाने वाला आपकी कविता पढ़े तो क्या कहेगा :

    जिसे घरौंदा कह रहे
    वो है मेरा आशियाना
    जो मुसीबत दीखती है
    ये है ‘उसका’ आजमाना !

    हौसला बुलंद है मेरा
    आपने और भी बढ़ा दिया
    कर्म अपना करके मैंने
    रब को है थमा दिया|

    फल वही देगा मुझे
    शायद हवा को फ़ानूस बना
    और चमकती धूप लाकर
    सर्दी को देगा भगा | 

    सही कहा आपने 
    बसंत फिर लौट आयेगा 
    उसी ने दर्द दिया है 
    तो वही सहलायेगा 
    मुझे पनाह देनेवाला 
    दुबारा लहलहाएगा |

    Liked by 1 person

  6. Indeed. And when the time comes, they get the strength to protect it. We have pigeons on our terrace, and normally it is easy to shoo them away. But once they have decided to make a nest where eggs will be laid, no power can move them.

    Liked by 1 person

  7. बहुत सुंदर लिखा है आपने ।मैंने भी लिखना शुरू किया है । मेरा पेज विजिट करिए और बताएं कि कैसा प्रयास है । पसन्द आए तो फॉलो कीजिए🙏🙏

    Liked by 2 people

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s