कैसी है ये पहेली….!!!!

कैसी है ये पहेली,
कभी है सहेली,
तो कभी है ये अकेली,
जिंदगी ही खुद में है एक पहेली,
कदम का साथी कौन,
सफर का हमराही कौन,
ये भी है एक पहेली
जिंदगी ही खुद में है एक पहेली
यूं तो मुसाफिर कई,
सफर तन्हा भी नहीं,
तेरे रास्ते का मकसद,
तुझ तक तू,
ये भी अपने आप में है एक पहेली,
तेरे सफर का तू राही,
मंज़िल तेरी इलाही,
उससे जुड़ना ही है काफी,
कैसी ये पहेली,
कभी है सहेली
तो कभी है अकेली,
जिंदगी ही खुद में है एक पहेली।
©Dr. Sakshi Pal

Author:

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28 thoughts on “कैसी है ये पहेली….!!!!

  1. बहुत ही खूबसूरत और सत्य लिखा है।👌👌

    मैं सुलझाऊँ,वो उलझाए,उलझन बढ़ते ही जाती,
    कैसी अबूझ पहेली जीवन,कुछ भी समझ नही आती।

    Liked by 3 people

  2. सहर आते,जाते,
    खुशियों के दहलीज पर खुद को तन्हां पाते,
    सफर है संग कई मुसाफिर भी,
    हमसफ़र उन्हें बताऊँ कैसे,
    ऐ जिंदगी,
    नफरत समझना आसान,प्रेम समझाऊँ कैसे,
    कशमकश में हैं,ये पहेली सुलझाऊँ कैसे
    अब तूँ ही बता ऐ जिंदगी,
    रिसते आँसुओं के बीच,
    मैं मुस्कुराऊँ कैसे?

    Liked by 2 people

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